Ek Geet Sau Afsane

Radio Playback India

Every song has its own journey once it is released for the audiences but there are many back stories behind every song about which we generally remained unaware, so this series is for bringing to you all such back stories related to many favorite songs of our times, that are very much part of our life, stay tuned with Sujoy Chatterjee and Sangya Tandon for a weekly dose of Ek Geet Sau Afsane

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“कभी तन्हाइयों में यूं, हमारी याद आयेगी”
1w ago
“कभी तन्हाइयों में यूं, हमारी याद आयेगी”
शोध व आलेख : सुजॉय चटर्जी वाचन स्वर : प्रज्ञा मिश्रा प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1961 की फ़िल्म ’हमारी याद आयेगी’ का शीर्षक गीत "कभी तन्हाइयों में यूं, हमारी याद आयेगी"। मुबारक बेगम की आवाज़, किदार शर्मा के बोल और स्नेहल भाटकर का संगीत। लता मंगेशकर के लिए बना यह गीत मुबारक बेगम से क्यों गवाया गया? रेकॉर्डिंग पर पहुँच कर मुबारक बेगम ने किदार शर्मा को कोने में ले जाकर क्या कहा कि किदार शर्मा की आँखों में आँसू आ गये? इस गीत के लिए मुबारक बेगम को उचित मेहनताना क्यों नहीं मिल पाया? मुबारक बेगम, उनका यह गीत और कल्याणजीभाई - इन तीनों का बद-दुआ से क्या सम्बन्ध है? गीत के संगीतकार स्नेहल भाटकर और फ़िल्म की नायिका तनुजा का आपस में कैसा फ़िल्मी सम्बन्ध रहा है? ये सब आज के इस अंक में।
“कभी तन्हाइयों में यूं, हमारी याद आयेगी”
1w ago
“कभी तन्हाइयों में यूं, हमारी याद आयेगी”
शोध व आलेख : सुजॉय चटर्जी वाचन स्वर : प्रज्ञा मिश्रा प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1961 की फ़िल्म ’हमारी याद आयेगी’ का शीर्षक गीत "कभी तन्हाइयों में यूं, हमारी याद आयेगी"। मुबारक बेगम की आवाज़, किदार शर्मा के बोल और स्नेहल भाटकर का संगीत। लता मंगेशकर के लिए बना यह गीत मुबारक बेगम से क्यों गवाया गया? रेकॉर्डिंग पर पहुँच कर मुबारक बेगम ने किदार शर्मा को कोने में ले जाकर क्या कहा कि किदार शर्मा की आँखों में आँसू आ गये? इस गीत के लिए मुबारक बेगम को उचित मेहनताना क्यों नहीं मिल पाया? मुबारक बेगम, उनका यह गीत और कल्याणजीभाई - इन तीनों का बद-दुआ से क्या सम्बन्ध है? गीत के संगीतकार स्नेहल भाटकर और फ़िल्म की नायिका तनुजा का आपस में कैसा फ़िल्मी सम्बन्ध रहा है? ये सब आज के इस अंक में।
“क़िस्मत ने हमें रोने के लिए दुनिया में अकेला छोड़ दिया...."
15-11-2022
“क़िस्मत ने हमें रोने के लिए दुनिया में अकेला छोड़ दिया...."
शोध व आलेख : सुजॉय चटर्जी प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1952 की फ़िल्म ’मोतीमहल’ का गीत "क़िस्मत ने हमें रोने के लिए दुनिया में अकेला छोड़ दिया"। सुरैया की आवाज़, असद भोपाली के बोल और हंसराज बहल का संगीत। ’बड़ी बहन’ और ’मोती महल’ फ़िल्मों में साथ-साथ अभिनय करते हुए सुरैया और बेबी तबस्सुम के बीच कैसे रिश्ते ने जन्म लिया? क्यों फ़िल्म ’मोती महल’ के एक सीन को करने से सुरैया घबरा गईं और जब उन्हें पता चला कि उस सीन पर एक पूरा का पूरा गाना फ़िल्माया जाना है तो उन्होंने तबस्सुम के सामने कैसे गुज़ारिश रख दीं? दर्दीला गीत होते हुए भी आँखों में आँसू लाने के लिए सुरैया ने ग्लिसरीन का प्रयोग क्यों नहीं किया? तबस्सुम ने सुरैया को उनके आख़िर के दिनों में कैसा पाया। ये सब आज के इस अंक में।
“ओ रे परिन्दे, तोड़ के फन्दे उड़ जा...."
08-11-2022
“ओ रे परिन्दे, तोड़ के फन्दे उड़ जा...."
शोध व आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : श्वेता पाण्डेय प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से  सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष 2022 की फ़िल्म ’अन्य’ का गीत "ओ रे परिन्दे"। सलमान अली और उर्मिला वर्मा की आवाज़ें, सजीव सारथी का गीत, और रामनाथ का संगीत। शुरू-शुरू में निर्देशक सिम्मी जॉसेफ़ इस सिचुएशन के लिए विपिन पटवा से गीत क्यों बनवाना चाहते थे? दस साल पहले लिखा यह गीत कैसे आ गिरा फ़िल्म ’अन्य’ की झोली में? सलमान अली के गाने के बावजूद गायक अरविन्द तिवारी का क्या सम्बन्ध है इस गीत के साथ? गीत में केवल एक पंक्ति के लिए गायिका उर्मिला वर्मा की आवाज़ क्यों ली गई? ये सब आज के इस अंक में।
“पानी दा रंग वेख के...."
01-11-2022
“पानी दा रंग वेख के...."
शोध व आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : दीपिका भाटिया प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष2012 की चर्चित फ़िल्म ’विक्की डोनर’ का गीत "पानी दा रंग वेख के"। आयुष्मान खुराना की आवाज़, तथा आयुष्मान खुराना और रोचक कोहली का लिखा व संगीतबद्ध किया हुआ गीत। जॉन एब्रहम ने अपनी इस पहली निर्मित फ़िल्म में ख़ुद हीरो बनने की बजाय आयुष्मान खुराना को लेने का क्यों फ़ैसला किया? आयुष्मान ने यह गीत कब और किसके साथ मिल कर बनाया था? दस सालों तक क्यों उन्होंने इस गीत को बाहर नहीं निकाला? फ़िल्म ’विक्की डोनर’ की झोली में यह गीत कैसे आया? किस तरह की शोहरत इस गीत ने हासिल की। आयुष्मान और रोचक कोहली की फ़िल्मोग्राफ़ी पर भी एक नज़र। ये सब आज के इस अंक में।
“तेरे लिए हम हैं जिये...."
25-10-2022
“तेरे लिए हम हैं जिये...."
शोध व आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : मीनू सिंह प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष 2004 की चर्चित फ़िल्म ’वीर ज़ारा’ का गीत "तेरे लिए हम हैं जीये"। लता मंगेशकर और रूप कुमार राठौड़ की आवाज़ें, जावेद अख़्तर के बोल, और मदन मोहन का संगीत। निधन के तीस साल बाद कैसे मदन मोहन बने ’वीर ज़ारा’ के संगीतकार? इस गीत की धुन तीस साल पहले किस गीत के लिए रची गई थी? लता मंगेशकर द्वारा ’वीर ज़ारा’ के गीतों को गाने से पहले कैसी शंका मन में उठी थी? फ़िल्म में उदित नारायण और सोनू निगम द्वारा शाहरुख़ ख़ान का प्लेबैक दिए जाने के बावजूद ख़ास इस गीत के लिए रूप कुमार राठौड़ को क्यों चुना गया? ये सब आज के इस अंक में।
“बिन तेरे सनम मर मिटेंगे हम...."
18-10-2022
“बिन तेरे सनम मर मिटेंगे हम...."
शोध व आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : शुभ्रा ठाकुर प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष 1991 की चर्चित फ़िल्म ’यारा दिलदारा’ का गीत "बिन तेरे सनम मर मिटेंगे हम"। उदित नारायण और कविता कृष्णमूर्ति की आवाज़ें, मजरूह सुल्तानपुरी के बोल, और जतिन-ललित का संगीत। जतिन-ललित से पहले जतिन के साथ किस संगीतकार की जोड़ी हुआ करती थी? फ़िल्म ’यारा दिलदारा’ के लिए जतिन के जोड़ीदार ललित कैसे बने? इस गीत से पहले निर्माता निर्देशक मिर्ज़ा ब्रदर्स के लिए जतिन ने कौन से काम किए? इस गीत के हिट होने का श्रेय ललित किसे मानते हैं? क्या हुआ जब एक रोज़ ललित ऑटोरिक्शे  में जा रहे थे और रेडियो पर यही बज उठा? ये सब आज के इस अंक में।
“ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें...."
11-10-2022
“ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें...."
शोध व आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : डॉ. शबनम खानम प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1981 की चर्चित फ़िल्म ’उमराव जान’ की ग़ज़ल "ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें"। तलत अज़ीज़ की आवाज़, शहरयार के बोल, और ख़य्याम का संगीत। यह ग़ज़ल फ़िल्म की स्क्रिप्ट में बाद में कैसे आया? क्यों ख़य्याम साहब ने इस ग़ज़ल के लिए चुनी तलत अज़ीज़ की आवाज़? क्या हुआ रिहर्सलों के दौरान ख़ैयाम साहब के घर पर? क्यों इस ग़ज़ल के रेकॉर्ड हो जाने के बाद भी तलत अज़ीज़ हर शुक्रवार ख़ैयाम साहब के घर जाया करते थे? और ख़ैयाम साहब उन्हें प्यार से क्या खिलाया करते? ये सब आज के इस अंक में।
"रस्म-ए-उल्फ़त को निभायें...."
04-10-2022
"रस्म-ए-उल्फ़त को निभायें...."
शोध व आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : उषा छाबड़ा प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष 1973 की फ़िल्म ’दिल की राहें’ की ग़ज़ल "रस्म-ए-उल्फ़त को निभायें तो निभायें कैसे"। लता मंगेशकर की आवाज़, नक्श ल्यालपुरी के बोल, और मदन मोहन का संगीत। फ़िल्म के निर्माता इस गाने के सिचुएशन पर ग़ज़ल की माँग की? क्यों नक्श ल्यालपुरी को फ़ूटपाथ के किनारे बैठ कर इस ग़ज़ल को लिखना पड़ा? क्या है इस ग़ज़ल के बनने की कहानी? जानिये नक्श साहब से मदन मोहन की शख़्सियत के बारे में। और कुछ बातें उस्ताद र‍ईस ख़ाँ की भी। ये सब आज के इस अंक में।
“पास बैठो तबियत बहल जाएगी...."
27-09-2022
“पास बैठो तबियत बहल जाएगी...."
शोध व आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : अतुल पाठक प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1964 की चर्चित फ़िल्म ’पुनर्मिलन’ का गीत "पास बैठो तबियत बहल जाएगी, मौत भी आ गई हो तो टल जाएगी"। मोहम्मद रफ़ी की आवाज़, इन्दीवर के बोल, और सी. अर्जुन का संगीत। इस गाने सिचुएशन सुन कर इन्दीवर, सी. अर्जुन को लेकर बस में क्यों बैठ गए? बस में ऐसी कौन से मज़ेदार बात हुई जिससे इस ग़ज़ल की नीव रखी गई? क्यों इन्दीवर ने बस में अपने बगल में बैठे सी. अर्जुन को सीट से उठ जाने को कहा? सी. अर्जुन क्यों चाहते थे कि रफ़ी साहब ही इस ग़ज़ल को गायें? ये सब आज के इस अंक में।
“देखने में भोला है दिल का सलोना...."
20-09-2022
“देखने में भोला है दिल का सलोना...."
शोध व आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : वाय.पद्मामणि प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष 1960 की चर्चित फ़िल्म ’बम्बई का बाबू’ का गीत "देखने में भोला है दिल का सलोना"। आशा भोसले और साथियों की आवाज़ें, मजरूह सुल्तानपुरी के बोल, और सचिन देव बर्मन का संगीत। क्यों विवादित है इस गीत की धुन? क्या इतिहास है इस गीत के धुन की? क्यों इस धुन से जुड़ा मामला अदालत तक पहुँचा था? क्यों इस गीत में नायिका अपने नायक को "चिन्नन्ना", यानी छोटा भाई कहती हैं? ये सब आज के इस अंक में।
“बेताब है दिल दर्द-ए-मोहब्बत के असर से...."
13-09-2022
“बेताब है दिल दर्द-ए-मोहब्बत के असर से...."
शोध व आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : प्रज्ञा मिश्रा प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन “बेताब है दिल दर्द-ए-मोहब्बत के असर से...." नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1947 की चर्चित फ़िल्म ’दर्द’ का गीत । सुरैया और उमा देवी की आवाज़ें, शकील बदायूनी के बोल, और नौशाद का संगीत। फ़िल्म ’दर्द’ में गीत गाने पहले उमा देवी के जीवन में कैसा दर्द था? ए. आर. कारदार के दफ़्तर में उमा देवी के किस आचरण से सब हैरान हुए जिसकी वजह से उन्हें फ़िल्म ’दर्द’ में गाने का मौका मिला? फ़िल्म’दर्द’ के गानों के बोल कैसे मेल खाते हैं उमा देवी के जीवन की घटनाओं से? अपनी पहली ही फ़िल्म में सिंगिंग स्टार सुरैया के साथ गाने का उनका अनुभव कैसा रहा? कुछ ऐसा ही कौन सा अनुभव सुरैया के शुरुआती दिनों का रहा? ये सब आज के इस अंक में।
“मैं बन की चिड़िया बनके बन-बन बोलूँ रे...."
06-09-2022
“मैं बन की चिड़िया बनके बन-बन बोलूँ रे...."
शोध व आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : श्वेता पाण्डेय प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष 1936 की चर्चित फ़िल्म ’अछूत कन्या’ का गीत "मैं बन की चिड़िया बनके बन-बन बोलूँ रे"। अशोक कुमार और देविका रानी की आवाज़ें, जे. एस. कश्यप के बोल, और सरस्वती देवी का संगीत। कैसे बॉम्बे टॉकीज़ की संगीतकार बनी सरस्वती देवी? कैसे बनी अशोक कुमार और देविका रानी की जोड़ी? किसने सिखाया देविका रानी को गाना? और आठ महीने तक किस राग को सीखते हुए अशोक कुमार ने अपने आप को गाना गाने के लिए तैयार किया? क्या ख़ास बातें हैं इस गीत की? ये सब आज के इस अंक में।
“तेरी गलियों में ना रखेंगे क़दम...."
30-08-2022
“तेरी गलियों में ना रखेंगे क़दम...."
शोध व आलेख : सुजॉय चटर्जी प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1974 की चर्चित फ़िल्म ’हवस’ का गीत "तेरी गलियों में ना रखेंगे क़दम"। मोहम्मद रफ़ी की आवाज़, सावन कुमार के बोल, और उषा खन्ना का संगीत। कैसे बनी सावन कुमार और उषा खन्ना की जोड़ी? क्यों इनकी शुरुआती फ़िल्मों में मोहम्मद रफ़ी और आशा भोसले की ही आवाज़ें मुख्य रूप से सुनने को मिलती थीं? किस घटना के बाद उषा खन्ना आशा भोसले और मोहम्मद रफ़ी के और क़रीब आ गईं? फ़िल्म ’हवस’ के एक गीत की रिकॉर्डिंग पर आशा भोसले ने उषा खन्ना की कौन सी चोरी पकड़ी? कैसा प्रदर्शन रहा रफ़ी साहब के गाये इस गीत का उस साल के वार्षिक गीतमाला में? ये सब आज के इस अंक में।
“मैं दुनिया भुला दूंगा तेरी चाहत में...."
23-08-2022
“मैं दुनिया भुला दूंगा तेरी चाहत में...."
शोध व आलेख : सुजॉय चटर्जी वाचन : सुशील पी प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1990 की चर्चित फ़िल्म ’आशिक़ी’ का गीत "मैं दुनिया भुला दूंगा तेरी चाहत में"। अनुराधा पौडवाल और कुमार सानू की आवाज़ें, समीर के बोल, और नदीम-श्रवण का संगीत। क्या रिश्ता है’चाहत’ ऐल्बम और ’आशिक़ी’ फ़िल्म का? कैसे बनी गुल्शन कुमार, अनुराधा पौडवाल, कुमार सानू, समीर और नदीम-श्रवण की टीम आशिक़ी? कैसे बने इस फ़िल्म के गीत? फ़िल्म के सभी गाने एक से बढ़ कर एक हैं, पर फिर भी क्यों ख़ास है "मैं दुनिया भुला दूंगा" गीत? ये सब आज के इस अंक में।
“आओगे जब तुम ओ साजना, अंगना फूल खिलेंगे...."
16-08-2022
“आओगे जब तुम ओ साजना, अंगना फूल खिलेंगे...."
शोध व आलेख : सुजॉय चटर्जी वाचन : पूजा अनिल प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष 2007 की चर्चित फ़िल्म ’जब वी मेट’ का गीत "आओगे जब तुम ओ साजना, अंगना फूल खिलेंगे"। उस्ताद राशिद ख़ान की आवाज़, फ़ैज़ अनवर के बोल, और संदेश शाण्डिल्य का संगीत। किस तरह से संदेश शाण्डिल्य फ़िल्मकारों की नज़र में आये? कब की फ़ैज़ अनवर और संदेश शाण्डिल्य ने इस stock song की रचना और इम्तिआज़ अली के झोले में यह कैसे जा गिरी? इम्तियाज़ और संदेश के बीच ट्युनिंग कब और कैसे जमी? कैसे तय हुआ इस गीत के गायक का नाम और किस तरह की यादें हैं संदेश के मन में इस गीत को उस्ताद राशिद ख़ान के सामने प्रस्तुत करने की? ये सब आज के इस अंक में।
“ऐ वतन वतन मेरे आबाद रहे तू...."
10-08-2022
“ऐ वतन वतन मेरे आबाद रहे तू...."
शोध व आलेख : सुजॉय चटर्जी वाचन व प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष2018 की चर्चित फ़िल्म ’राज़ी’ का गीत "ऐ वतन वतन मेरे आबाद रहे तू"। सुनिधि चौहान और अरिजीत सिंह की मुख्य आवाज़ें, गुलज़ार और अल्लामा इक़बाल के बोल, और शंकर-अहसान-लॉय का संगीत। कैसे लिखा गया यह गीत? क्यों यह गीत किसी भी पक्षपात से परे है? गुलज़ार ने क्यों इक़बाल के बोलों को अपने गीत में जगह दी? किस तरह से रचा गया इस गीत का संगीत? कौन कौन हैं इस गीत के कोरस गायकों में शामिल? इस गीत के लिए शंकर-अहसान-लॉय ने कौन सी विपरीत दिशा पकड़ने की बात कही है? ये सब आज के इस अंक में।
“तू मुस्कुरा जहाँ भी है तू मुस्कुरा...."
02-08-2022
“तू मुस्कुरा जहाँ भी है तू मुस्कुरा...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी वाचन : प्रज्ञा मिश्रा प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष2008 की चर्चित फ़िल्म ’युवराज’ का गीत "तू मुस्कुरा जहाँ भी है तू मुस्कुरा"। अलका यागनिक और जावेद अली की आवाज़ें, गुलज़ार के बोल, और ए. आर. रहमान का संगीत। कहाँ से आयी इस गीत की धुन? क्यों फ़िल्म पूरी होने के बाद इस गीत को बनाने का फ़ैसला लिया गया? कैसे बना फिर यह गीत? जावेद अली की आवाज़ इस गीत में ज़रा अलग हट के क्यों सुनाई देती है? क्या हुआ था ऑल इण्डिया रेडियो की उर्दू सर्विस की स्टुडियो में इस गीत को बजाते हुए? ये सब आज के इस अंक में।
“एक ही ख़्वाब कई बार देखा है मैंने...."
26-07-2022
“एक ही ख़्वाब कई बार देखा है मैंने...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी वाचन : दीपिका भाटिया प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1977 की चर्चित फ़िल्म ’किनारा’ का गीत "एक ही ख़्वाब कई बार देखा है मैंने"। भूपेन्द्र और हेमा मालिनी की आवाज़ें, गुलज़ार के बोल, और राहुल देव बर्मन का संगीत। इस गीत की रेकॉर्डिंग पर हेमा मालिनी के साथ गाते हुए भूपेन्द्र को कैसी दिक्कत हो रही थी? गीत बनने के बाद जब यह थोड़ा डल लग रहा था तो भूपेन्द्र ने ऐसा कौन सा जादू चलाया कि गीत खिल उठा? इस गीत के निर्माण के समय गीत के बोलों पर गुलज़ार और पंचम के बीच किस तरह की बहसें हुआ करती थीं? इस गीत के बाद पंचम ने गुलज़ार का नाम "चाबियाँ" क्यों रख दी थीं? इस गीत के साथ धर्मेन्द्र किस नाटकीय अंदाज़ से जुड़े? ये सब आज के इस अंक में।
“तेरी झलक अशरफ़ी श्रीवल्ली...."
21-07-2022
“तेरी झलक अशरफ़ी श्रीवल्ली...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष2021 की चर्चित फ़िल्म ’पुष्पा - दि राइज़’ का गीत "तेरी झलक अशरफ़ी श्रीवल्ली"। जावेद अली की आवाज़, रक़ीब आलम के बोल, और देवी श्रीप्रसाद का संगीत। हर किसी की ज़ुबान पर चढ़ने वाला इस ताज़ा-तरीन गीत की क्या कहानी है? मूल तेलुगु गीत के हिन्दी संस्करण को गाने के लिए कैसे चुनाव हुआ जावेद अली का? रिकॉर्डिंग के साथ वरिष्ठ संगीतकार इलैयाराजा से जुड़े कौन सा प्रसंग जुड़ा हुआ है? "श्रीवल्ली" की जगह "श्रीदेवी" रखे जाने पर विचार-विमर्श क्यों चल पड़ा था? कौन से साज़िन्दे हैं इस सुमधुर गीत के पीछे? ये सब आज के इस अंक में।
“क्योंकि तुम ही हो, मेरी आशिक़ी अब तुम ही हो...."
12-07-2022
“क्योंकि तुम ही हो, मेरी आशिक़ी अब तुम ही हो...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : निमिषा सिंघल  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष2013 की चर्चित फ़िल्म ’आशिक़ी-2’ का गीत "क्योंकि तुम ही हो"। अरिजीत सिंह की आवाज़, मिथुन के बोल, और मिथुन का ही संगीत। जब ’आशिक़ी’ फ़िल्म के रीमेक की बात चली तब इसके गीत-संगीत पक्ष को लेकर क्या-क्या तर्क़-वितर्क़ चले? नई फ़िल्म और मूल फ़िल्म के शीर्षक गीत में कैसा फ़र्क़ और कैसी समानतायें महसूस की गईं? इस गीत के दो संस्करणों के निर्माण के पीछे कौन सी कहानी छुपी है? ये सब आज के इस अंक में।