बात पते की

Pushkar Son

यह पोडकास्ट पूरी तरह आपके इर्द-गिर्द रहने वाली किस्सा कहानी, राजनीतिक गतिविधियां, पर्यटन क्षेत्र से रूबरू कराने से लेकर सामाजिक सरोकार के काम का विवरण देने वाला होगा. इसमें बात आपके हित की होगी किसी दूसरे की हित की नहीं. इन किस्से कहानियों से लेकर सामाजिक गतिविधियां आपको समाज के करीब ले जाने का काम करेंगी. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए नई जानकारियों और मनोरंजक किस्सों का खजाना होगा यह पॉडकास्ट. read less
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आचरण और बोली से बनती है पहचान
Nov 6 2022
आचरण और बोली से बनती है पहचान
आचरण और बोली व्यक्ति की पहचान बता देती है. ऐसी ही एक कहानी है साधु और राजा की. राजा की गांव से सवारी निकलना थी तो उससे पहले रास्ते का मुआयना किया गया. उस दौरान सड़क पर एक अपाहिज साधु बैठा हुआ था उसे देखते ही सुरक्षा जवान भड़क गया और गाली तक दे डाली मगर साधु था कि उसने कुछ नहीं बोला सिर्फ इतना कहा तभी तो. फिर उसके बाद सुरक्षा अधिकारी निकला और उसने भी साधु को डांटा इस पर साधु का जवाब था तभी तो. फिर उसी रास्ते से मंत्री का गुजर ना हुआ और उसने साधु को सड़क पर देखकर यही कहा महात्मा जी आपको सड़क पर नहीं बैठना चाहिए क्योंकि राजा की सवारी निकलने वाली है. मंत्री की बात सुनकर भी साधु का जवाब था तभी तो. जब राजा की सवारी निकली तो सड़क पर बैठे साधु को देखकर राजा अपनी बग्गी से उतरे और हाथ जोड़कर साधु से कहने लगे महात्मा जी अगर हमें पता होता कि आप यहां बैठे हैं तो मैं इस रास्ते से ना निकलता. राजा की बात सुनते ही साधु का फिर वही जवाब था तभी तो. यह पूरा घटनाक्रम एक व्यक्ति देख रहा था और राजा की सवारी निकलने के बाद वह साधु के पास पहुंचा और उसने सवाल किया महात्मा जी आपने सभी को एक ही जवाब दिया तभी तो, आखिर ऐसा क्यों. इस पर साधु का जवाब था कि वह सिपाही था इसलिए उसका ऐसा आचरण था सुरक्षा अधिकारी और मंत्री का आचरण का भी. राजा का आचरण ऐसा था इसीलिए तो वह राजा था. इसका आशय साफ है कि व्यक्ति की बोली और आचरण उसकी हैसियत को उजागर करता है.