Ek Geet Sau Afsane

Radio Playback India

Every song has its own journey once it is released for the audiences but there are many back stories behind every song about which we generally remained unaware, so this series is for bringing to you all such back stories related to many favorite songs of our times, that are very much part of our life, stay tuned with Sujoy Chatterjee and Sangya Tandon for a weekly dose of Ek Geet Sau Afsane

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“तू मुस्कुरा जहाँ भी है तू मुस्कुरा...."
1w ago
“तू मुस्कुरा जहाँ भी है तू मुस्कुरा...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी वाचन : प्रज्ञा मिश्रा प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष2008 की चर्चित फ़िल्म ’युवराज’ का गीत "तू मुस्कुरा जहाँ भी है तू मुस्कुरा"। अलका यागनिक और जावेद अली की आवाज़ें, गुलज़ार के बोल, और ए. आर. रहमान का संगीत। कहाँ से आयी इस गीत की धुन? क्यों फ़िल्म पूरी होने के बाद इस गीत को बनाने का फ़ैसला लिया गया? कैसे बना फिर यह गीत? जावेद अली की आवाज़ इस गीत में ज़रा अलग हट के क्यों सुनाई देती है? क्या हुआ था ऑल इण्डिया रेडियो की उर्दू सर्विस की स्टुडियो में इस गीत को बजाते हुए? ये सब आज के इस अंक में।
“तू मुस्कुरा जहाँ भी है तू मुस्कुरा...."
1w ago
“तू मुस्कुरा जहाँ भी है तू मुस्कुरा...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी वाचन : प्रज्ञा मिश्रा प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष2008 की चर्चित फ़िल्म ’युवराज’ का गीत "तू मुस्कुरा जहाँ भी है तू मुस्कुरा"। अलका यागनिक और जावेद अली की आवाज़ें, गुलज़ार के बोल, और ए. आर. रहमान का संगीत। कहाँ से आयी इस गीत की धुन? क्यों फ़िल्म पूरी होने के बाद इस गीत को बनाने का फ़ैसला लिया गया? कैसे बना फिर यह गीत? जावेद अली की आवाज़ इस गीत में ज़रा अलग हट के क्यों सुनाई देती है? क्या हुआ था ऑल इण्डिया रेडियो की उर्दू सर्विस की स्टुडियो में इस गीत को बजाते हुए? ये सब आज के इस अंक में।
“एक ही ख़्वाब कई बार देखा है मैंने...."
26-07-2022
“एक ही ख़्वाब कई बार देखा है मैंने...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी वाचन : दीपिका भाटिया प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1977 की चर्चित फ़िल्म ’किनारा’ का गीत "एक ही ख़्वाब कई बार देखा है मैंने"। भूपेन्द्र और हेमा मालिनी की आवाज़ें, गुलज़ार के बोल, और राहुल देव बर्मन का संगीत। इस गीत की रेकॉर्डिंग पर हेमा मालिनी के साथ गाते हुए भूपेन्द्र को कैसी दिक्कत हो रही थी? गीत बनने के बाद जब यह थोड़ा डल लग रहा था तो भूपेन्द्र ने ऐसा कौन सा जादू चलाया कि गीत खिल उठा? इस गीत के निर्माण के समय गीत के बोलों पर गुलज़ार और पंचम के बीच किस तरह की बहसें हुआ करती थीं? इस गीत के बाद पंचम ने गुलज़ार का नाम "चाबियाँ" क्यों रख दी थीं? इस गीत के साथ धर्मेन्द्र किस नाटकीय अंदाज़ से जुड़े? ये सब आज के इस अंक में।
“तेरी झलक अशरफ़ी श्रीवल्ली...."
21-07-2022
“तेरी झलक अशरफ़ी श्रीवल्ली...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष2021 की चर्चित फ़िल्म ’पुष्पा - दि राइज़’ का गीत "तेरी झलक अशरफ़ी श्रीवल्ली"। जावेद अली की आवाज़, रक़ीब आलम के बोल, और देवी श्रीप्रसाद का संगीत। हर किसी की ज़ुबान पर चढ़ने वाला इस ताज़ा-तरीन गीत की क्या कहानी है? मूल तेलुगु गीत के हिन्दी संस्करण को गाने के लिए कैसे चुनाव हुआ जावेद अली का? रिकॉर्डिंग के साथ वरिष्ठ संगीतकार इलैयाराजा से जुड़े कौन सा प्रसंग जुड़ा हुआ है? "श्रीवल्ली" की जगह "श्रीदेवी" रखे जाने पर विचार-विमर्श क्यों चल पड़ा था? कौन से साज़िन्दे हैं इस सुमधुर गीत के पीछे? ये सब आज के इस अंक में।
“क्योंकि तुम ही हो, मेरी आशिक़ी अब तुम ही हो...."
12-07-2022
“क्योंकि तुम ही हो, मेरी आशिक़ी अब तुम ही हो...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : निमिषा सिंघल  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष2013 की चर्चित फ़िल्म ’आशिक़ी-2’ का गीत "क्योंकि तुम ही हो"। अरिजीत सिंह की आवाज़, मिथुन के बोल, और मिथुन का ही संगीत। जब ’आशिक़ी’ फ़िल्म के रीमेक की बात चली तब इसके गीत-संगीत पक्ष को लेकर क्या-क्या तर्क़-वितर्क़ चले? नई फ़िल्म और मूल फ़िल्म के शीर्षक गीत में कैसा फ़र्क़ और कैसी समानतायें महसूस की गईं? इस गीत के दो संस्करणों के निर्माण के पीछे कौन सी कहानी छुपी है? ये सब आज के इस अंक में।
“कभी ना कभी, कहीं ना कहीं, कोई ना कोई तो आएगा...."
05-07-2022
“कभी ना कभी, कहीं ना कहीं, कोई ना कोई तो आएगा...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : दीपिका भाटिया प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1964 की चर्चित फ़िल्म ’शराबी’ का गीत "कभी ना कभी, कहीं ना कहीं, कोई ना कोई तो आएगा"। मोहम्मद रफ़ी की आवाज़, राजिन्दर कृष्ण के बोल, और मदन मोहन का संगीत। 1958 में बन कर प्रदर्शित होने वाली इस फ़िल्म को बन कर तैयार होने में छह साल क्यों लग गए? इस गीत में1958 की दादा बर्मन के किस गीत के साथ समानता नज़र आती है? इस गीत के साथ रफ़ी साहब और बनारस का कौन सा मार्मिक किस्सा जुड़ा हुआ है? साथ ही राजिन्दर कृष्ण की लेखनी का विश्लेषण। ये सब आज के इस अंक में।
“करोगे याद तो हर बात याद आयेगी...."
29-06-2022
“करोगे याद तो हर बात याद आयेगी...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर व प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1982 की चर्चित फ़िल्म ’बाज़ार’ का गीत "करोगे याद तो हर बात याद आयेगी"। भूपेन्द्र की आवाज़, बशर नवाज़ के बोल, और ख़य्याम का संगीत। फ़िल्म ’बाज़ार’ के गीतों के लिए ख़य्याम साहब को क्या सूझा? फ़िल्म’बाज़ार’ के लिए बशर नवाज़ की लिखी यह ग़ज़ल उनका बेमिसाल होना कैसे साबित करती है? और किन किन फ़िल्मों में गाने लिखे बशर साहब ने? फ़िल्म ’शंकर ख़ान’ के लिए उनका लिखा गीत अनोखा क्यों है? ये सब और बशर नवाज़ से सम्बन्धित और भी रोचक जानकारियाँ, आज के अंक में।
"सात अजूबे इस दुनिया में आठवीं अपनी जोड़ी...."
21-06-2022
"सात अजूबे इस दुनिया में आठवीं अपनी जोड़ी...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर :  मीनू सिंह  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1977 की चर्चित फ़िल्म ’धरम वीर’ का गीत "सात अजूबे इस दुनिया में आठवीं अपनी जोड़ी"। मोहम्मद रफ़ी और मुकेश की आवाज़ें, आनन्द बक्शी के बोल, और लक्ष्मीकान्त-प्यारेलाल का संगीत। रफ़ी साहब और मुकेश जी का साथ में गाया पहला और आख़िरी डुएट कौन से थे? इस गीत के शुरुआती मुखड़े में गायकों की आवाज़ों और फ़िल्मांकन में कैसी गड़बड़ी हुई? गीत के एक अन्तरे को लेकर महिला समितियों ने विरोध प्रदर्शन क्यों किया? और इस विरोध के चलते अन्तरे के शब्दों में किस तरह के बदलाव किए गए? ये सब, आज के अंक में।
“फूल तुम्हें भेजा है ख़त में...."
14-06-2022
“फूल तुम्हें भेजा है ख़त में...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर :  अल्पना सक्सेना प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1968 की चर्चित फ़िल्म ’सरस्वतीचन्द्र’ का गीत "फूल तुम्हें भेजा है ख़त में"। लता मंगेशकर और मुकेश की आवाज़ें, इन्दीवर के बोल, और कल्याणजी-आनन्दजी का संगीत। कैसे प्रेमपत्र कल्याणजी-आनन्दजी के घर पर आया था? क्या लिखा था उसमें? इन्दीवर ने उस पत्र को देख कर क्या कहा? गीत तैयार होने पर कल्याणजी-आनन्दजी के मन में कैसी शंका पैदा हुई और उनकी शंका का निवारण कैसे हुआ? इस फ़िल्म को उस साल कौन-कौन से पुरस्कार मिले थे? ये सब, आज के अंक में।
“तू जो मिला, लो हो गया मैं क़ाबिल...."
07-06-2022
“तू जो मिला, लो हो गया मैं क़ाबिल...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर :  शुभ्रा ठाकुर प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’ रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष2015 की चर्चित फ़िल्म ’बजरंगी भाईजान’ का गीत "तू जो मिला, लो हो गया मैं क़ाबिल"। केके की आवाज़, कौसर मुनीर के बोल, और प्रीतम का संगीत। शुरू-शुरू में किस फ़िल्म के गीत के लिए यह धुन बनी थी? इस गीत के लिए केके की आवाज़ का चुनाव कैसे हुआ? किस तरह की मुश्किलें थीं इस गीत को रेकॉर्ड करने में? किस वजह से केके छुट्टी पर होते हुए भी गीत को रेकॉर्ड करने का फ़ैसला किया? और इसे रेकॉर्ड करते हुए उनका कौन सा सपना पूरा हुआ? इस गीत को दो मिनट केbackground song के रूप में रखे जाने के फ़ैसले को बाद में क्यों बदला गया? ये सब, आज के अंक में।
“ज़िन्दगी फूलों की नहीं, फूलों की तरह महकी रहे...."
31-05-2022
“ज़िन्दगी फूलों की नहीं, फूलों की तरह महकी रहे...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर :  डॉ. शबनम खानम प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1979 की चर्चित फ़िल्म ’गृहप्रवेश’ का गीत "ज़िन्दगी फूलों की नहीं, फूलों की तरह महकी रहे"। भूपेन्द्र की आवाज़, गुलज़ार के बोल, और कानु रॉय का संगीत। संगीतकार बनने से पहले कानु रॉय ने फ़िल्म जगत में और फ़िल्म जगत के बाहर कौन से काम किया करते थे? उनके रचे गीतों में साज़ और साज़िन्दे की कमी क्यों हुआ करती थीं? उनके बारे में अधिक मालूमात लोगों को क्यों नहीं है? उनके संगीत देने की शैली की एक मज़ेदार बात क्या थी? इस गीत को गुलज़ार साहब अपना उम्दा गीत क्यों नहीं मानते? गुलज़ार साहब के अनुसार किसी गीत के संदर्भ में कैसी दलीलें नहीं चलतीं? ये सब, आज के अंक में।
“हमको हँसते देख ज़माना जलता है...."
24-05-2022
“हमको हँसते देख ज़माना जलता है...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर :  निमिषा सिंघल  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1956 की मशहूर फ़िल्म ’हम सब चोर हैं’ का गीत "हमको हँसते देख ज़माना जलता है"। जी. एम. दुर्रानी और मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ें, मजरूह सुल्तानपुरी के बोल, और ओ. पी. नय्यर का संगीत। किस तरह का ताना-बाना था जी. एम. दुर्रानी और मोहम्मद रफ़ी के सुरीले सम्बन्ध का? कैसे दोनों दो मोड़ पर एक दूसरे के काम आये? क्या नाता है इसका फ़िल्म’हम सब चोर हैं’ के इस गीत के साथ? आगे चल कर किस फ़िल्म में रफ़ी साहब ने दुर्रानी साहब का पार्श्वगायन किया? ये सब, आज के अंक में।
“ये कहाँ आ गए हम यूंही साथ-साथ चलते...."
17-05-2022
“ये कहाँ आ गए हम यूंही साथ-साथ चलते...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर :  सुशील पी प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष 1981 की मशहूर फ़िल्म ’सिलसिला’ का गीत "ये कहाँ आ गए हम यूंही साथ-साथ चलते"। लता मंगेशकर और अमिताभ बच्चन की आवाज़ें, जावेद अख़्तर के बोल, और शिव-हरि का संगीत। जानिए इस गीत के बनने की दिलचस्प कहानी स्वयम पंडित शिव कुमार शर्मा के शब्दों में। जावेद अख़तर ने शुरू में फ़िल्म में गीत लिखने से यश चोपड़ा को क्यों मना कर दिया था? और फिर मुंह में ख़ून लगने की बात क्यों की? फ़िल्म ’सिलसिला’ के बनने के अगले साल इसी गीत के जैसा कौन सा गीत बना और इस गीत के साथ उसका क्या रिश्ता था? जानिए ये सब, आज के अंक में।
“मैं हूँ ख़ुशरंग हिना...."
10-05-2022
“मैं हूँ ख़ुशरंग हिना...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर :  पायल विशाल  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष 1991 की मशहूर फ़िल्म ’हिना’ का गीत "मैं हूँ ख़ुशरंग हिना"। लता मंगेशकर की आवाज़, रवीन्द्र जैन के बोल, और उन्हीं का संगीत। टीवी धारावाहिक ’रामायण’ में अपने रचे गीत को राज कपूर को सुनवाने पर रवीन्द्र जैन की परेशानी क्यों बढ़ गई और इसका फ़िल्म ’हिना’ के गीतों से क्या सम्बन्ध था? क्यों राज कपूर अपने ख़र्चे पर रवीन्द्र जैन को कश्मीर ले गए? कैसे बना फ़िल्म ’हिना’ के इस शीर्षक गीत का मुखड़ा? लता जी और रवीन्द्र जैन साहब के बीच friction की क्या वजह थी? ये सब और फ़िल्म ’हिना’ के गीत-संगीत की कुछ और बातें, आज के अंक में।
“It’s magic, it’s magic...."
03-05-2022
“It’s magic, it’s magic...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर :  दीपिका भाटिया  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष2003 की मशहूर फ़िल्म ’कोई मिल गया’ का गीत "it's magic, it's magic"। ताज़ स्टिरियो नेशन की आवाज़, इब्राहिम अश्क़ के बोल, और राजेश रोशन का संगीत। कौन हैं ये ताज़, क्या है उनका असली नाम और परिचय? कैसे मौका मिला उन्हें किसी हिन्दी फ़िल्म में गाने का? कैसे चुना गया उन्हें ह्रितिक रोशन के प्लेबैक के लिए? ताज़ स्टिरिओ नेशन को श्रद्धांजलि स्वरूप आज के ’एक गीत सौ अफ़साने’ का यह अंक। आइए सुनें।
”डफ़ली वाले, डफ़ली बजा...."
26-04-2022
”डफ़ली वाले, डफ़ली बजा...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर :  प्रज्ञा मिश्रा  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1979 की मशहूर फ़िल्म ’सरगम’ का गीत "डफ़ली वाले, डफ़ली बजा"। लता मंगेशकर और मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ें, आनन्द बक्शी के बोल, और लक्ष्मीकान्त-प्यारेलाल का संगीत। शुरू-शुरू में क्यों नहीं पसन्द आया था फ़िल्म के निर्माता और निर्देशक को यह गीत? गीत रेकॉर्ड होने के बाद फ़िल्मांकन का क्या मसला था? किस तरह की अप्रत्याशित सफलता इस गीत को मिली? इस गीत के बनने के दस साल बाद ऐसा ही एक और कौन सा गीत बना जिसमें ॠषि कपूर डफ़ली बजाते देखे गए? ये सब, आज के अंक में।
“तेरे प्यार का आसरा चाहता हूँ...."
19-04-2022
“तेरे प्यार का आसरा चाहता हूँ...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर :  दीप्ति अग्रवाल  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन  ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1959 की फ़िल्म ’धूल का फूल’ का गीत "तेरे प्यार का आसरा चाहता हूँ"। लता मंगेशकर और महेन्द्र कपूर की आवाज़ें, साहिर लुधियानवी के बोल, और एन. दत्ता का संगीत।Sound Recordist कौशिक साहब की किस बात पर यश चोपड़ा साहब को बिलकुल यकीन नहीं हुआ? ’धूल का फूल’ फ़िल्म के गीतों को मोहम्मद रफ़ी और महेन्द्र कपूर में बाँटने का फ़ैसला क्यों किया गया और गाने कैसे बाँटे गए? गीत की लम्बी अवधि को लेकर किस तरह की बहस हुई यश जी और साहिर साहब के बीच? गीत की रेकॉर्डिंग पर महेन्द्र कपूर साहब क्यों नर्वस हो गए? ये सब, आज के अंक में।
“जब से तूने बंसी बजायी रे...."
11-04-2022
“जब से तूने बंसी बजायी रे...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर :  वर्षा रावल  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष 1974 की फ़िल्म ’आरोप’ का गीत "जब से तूने बंसी बजायी रे"। लक्ष्मी शंकर की आवाज़, माया गोविन्द का गीत, और भूपेन हज़ारिका का संगीत। माया गोविन्द के साथ श्रीकृष्ण भक्ति-श्रॄंगार का कैसा नाता रहा है जो इस गीत में भी साफ़ झलकता है? कृष्ण-भक्ति से संबन्धित किस बात पर अचला नागर जी ने माया जी की चुटकी ली थी? किस जानीमानी बांग्ला अभिनेत्री पर यह गीत फ़िल्माया गया है? इस गीत की मूल धुन किस गीत से प्रेरित है? ये सब, आज के अंक में।
“रिमझिम के तराने लेके आयी बरसात...."
05-04-2022
“रिमझिम के तराने लेके आयी बरसात...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर :  सुशील पी  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष 1960 की मशहूर फ़िल्म ’काला बाज़ार’ का गीत "रिमझिम के तराने लेके आयी बरसात"। मोहम्मद रफ़ी और गीता दत्त की आवाज़ें, गीतकार शैलेन्द्र, और संगीतकार सचिन देव बर्मन। क्यों इस गीत के लिए चुनी गई गीता दत्त की आवाज़ जबकि फ़िल्म में वहीदा रहमान का प्लेबैक कर रही थीं आशा भोसले? क्या थी संगीतकार सचिन देव बर्मन की शर्त? क्यों गीता दत्त ने शुरू शुरू में इस गीत को गाने से मना कर दिया? एक रोमान्टिक डुएट होते हुए भी क्यों इस गीत का इस्तमाल महज़ एक background music की तरह किया गया और वह भी आधा-अधूरा? ये सब, आज के अंक में।
“हर कोई चाहता है इक मुट्ठी आसमाँ...."
29-03-2022
“हर कोई चाहता है इक मुट्ठी आसमाँ...."
आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर :  पूजा अनिल  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1973 की कमचर्चित फ़िल्म ’एक मुट्ठी आसमाँ’ का शीर्षक गीत "हर कोई चाहता है इक मुट्ठी आसमाँ"। किशोर कुमार की आवाज़; गीतकार इन्दीवर, और संगीतकार मदन मोहन  ये सब, आज के अंक में।
"हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं"
22-03-2022
"हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं"
आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर :  नीलम यादव  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष 1985 की सुप्रसिद्ध फ़िल्म ’फ़ासले’ का गीत "हम चुप हैं के दिल सुन रहे हैं"। लता मंगेशकर और किशोर कुमार की आवाज़ें; गीतकार शहरयार, और संगीतकार शिव-हरि। ’गमन’ और ’उमराव जान’ जैसी इन्टेन्स फ़िल्मों में लिखने के बाद ’फ़ासले’ फ़िल्म के गाने लिखने के लिए कैसे तैयार हुए शहरयार साहब? इसके बाद यश चोपड़ा द्वारा अगली तीन फ़िल्मों में गीत लिखने के offer को क्यों ठुकरा दिया शहरयार ने? इस गीत के साथ कैसी यादें जुड़ी हैं अभिनेता रोहन कपूर की? उस साल अन्य किन फ़िल्मों के गीतों ने ज़बरदस्त टक्कर दिया और वाषिक गीतमाला में कैसा प्रदर्शन रहा इस गीत का? ये सब, आज के अंक में।