धन का महत्व

भीष्म नीति Bheeshma Neeti

08-08-2022 • 48 seconds

राजा को अपनी प्रजा का भरण-पोषण करना चाहिये। राजा साधु पुरुषों के हाथ से कभी धन न छीने और असाधु पुरुषों से दण्ड स्वरूप धन का अर्जन करे।

स्वयं प्रहर्ता दाता च वश्यात्मा रम्यसाधनः।

काले दाता च भोक्ता च शुद्धाचारस्तथैव च।।

राजा स्वयं दुष्टों पर प्रहार करे, दानशील बने, मन को वश में रखे, सुरम्य साधन से युक्त रहे, समय-समय पर धन का दान करे और उपयोग भी करे तथा निरंतर शुद्ध और सदाचारी बना रहे।